राज्य लोक सूचना अधिकारी के द्वारा दिये गये निर्णय के औचित्य को प्रमाणित करने का उत्तरदायित्व राज्य लोक सूचना अधिकारी पर है।
अपील की सुनवाई के उपरान्त आयोग राज्य लोक सूचना अधिकारी को सूचना प्रकट करने हेतु आदेशित कर सकता है एवं सूचना उपलब्ध कराने में राज्य लोक सूचना अधिकारी के स्तर से लापवरवाही पाये जाने अथवा समय से सूचना उपलब्ध न कराने की स्थिति में आयोग अर्थ दण्ड भी अधिरोपित कर सकता है अथवा लोक प्राधिकरण को राज्य सूचना अधिकारी के विरुद्ध विभागीय कार्यवाही की संस्तुति भी कर सकता है। अपील अधारहीन पाने पर निरस्त भी कर सकता है। इसके अतिरिक्त अपीलकर्ता को लोक प्राधिकरण से क्षतिपूर्ति भी दिला सकता है एवं लोक प्राधिकरण को अधिनियम के प्राविधानों को लागू करने हेतु भी निर्देशित कर सकता है।
किसी शिकायत की जॉच के लिये आयोग को कारगर जांच हेतु वे सभी अधिकार हैं जो किसी भी सिविल कोर्ट को निम्नलिखित मामलों में सिविल प्रोसीजर कोड 1908 के तहत प्राप्त हैं।
नहीं, राज्य सूचना आयोग या केन्द्रीय सूचना आयोग के लिए शिकायत अथवा अपील के निस्तारण की कोई समय सीमा निर्धारित नहीं है।
सूचना आयोग को अधिनियम की धारा-20 के अन्तर्गत् राज्य लोक सूचना अधिकारी को दण्डित करने की शक्ति प्राप्त है। राज्य सूचना आयोग सूचना नहीं देने वाले राज्य लोक सूचना अधिकारी को दंडित कर सकता है।
यदि किसी शिकायत या अपील की सुनवाई के दौरान सूचना आयोग पाए कि:
शिकायत या अपील की सुनवाई के दौरान उपर्युक्त दोषों में से किसी दोष का दोषी पाये जाने पर राज्य लोक सूचना अधिकारी को सूचना आयोग 250/- प्रति दिन जिसकी अधिकतम सीमा 25000/- होगी से दंडित कर सकता है।
जी हॉ। अर्थ दण्ड अधिरोपित करने से पूर्व आयोग द्वारा राज्य लोक सूचना अधिकारी को सुनवाई का अवसर देना आवश्यक है।
सूचना का अधिकार के कार्यान्वयन एवं अनुश्रवण करने का अधिकार सूचना आयोग को है। अधिनिमय की धारा-25 के अनुसार वर्ष के अंत में आयोग अधिनियम के कार्यान्वयन पर अपना प्रतिवेदन तैयार करेगा और उसे राज्य सरकार को भेजेगा। सूचना आयोग वार्षिक प्रतिवेदन तैयार करने हेतु प्रत्येक लोक प्राधिकरण से निम्नलिखित प्रतिवेदन मांगेगा -
सूचना आयोग को यह भी अधिकार है कि किसी लोक प्राधिकारण को अधिनियम के प्रावधानों के अनुरूप कार्य करने के लिए सही कदम सुझा सकता है। आयोग द्वारा तैयार वार्षिक प्रतिवेदन को विधायिका के पटल पर रखा जाएगा।
राज्य मुख्य सूचना आयुक्त एवं राज्य सूचना आयुक्त की नियुक्ति राज्यपाल एक समिति की अनुशंसा पर करेंगे। समिति के निम्न सदस्य होंगे।
मुख्य सूचना आयुक्त एवं अन्य सूचना आयुक्तगण की नियुक्ति ऐसे व्यक्ति की होगी जो सार्वजनिक जीवन में ख्याति प्राप्त हो और जिन्हें विधि, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, समाज सेवा, प्रबंधन, पत्रकारिता, मीडिया या प्रशासन का व्यापक अनुभव हो।
अधिनियम में प्राविधान है कि इन पदों पर निम्नलिखित व्यक्तियों की नियुक्ति नहीं हो सकती:
राज्य सूचना आयोग के मुख्य सूचना आयुक्त एवं राज्य सूचना आयुक्त पदभार ग्रहण करने की तिथि से 5 वर्ष पूरा होने या 65 वर्ष की आयु पूर्ण होने पर सेवानिवृत हो जाएंगे। इनकी पुनः नियुक्ति नहीं होगी।