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Uttar Pradesh Information Commission

  FAQs

राज्य मुख्य सूचना आयुक्त का वेतन एवं भत्ता भारत के निर्वाचन आयोग के निर्वाचन आयुक्त के समकक्ष और अन्य राज्य सूचना आयुक्तगण का वेतन भत्ता वही होगा जो राज्य के मुख्य सचिव का है।

यदि ऑफिशियल सीक्रेट एक्ट 1923 अथवा अन्य तत्ससमय प्रवृत्त किसी कानून का प्रावधान सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के प्रावधान से मेल नहीं खाता है तो इस परिस्थिति में सूचना का अधिकार अधिनियम को प्राथमिकता दी जाएगी।

यदि इस अधिनियम के क्रियान्वयन के लिए कोई पदाधिकारी सद्भावपूर्वक कार्य करता है तो उसे दंडित नहीं किया जायेगा।

नहीं, अधिनियम में प्राविधान है कि इस अधिनियम के तहत किये गये किसी कार्य या आदेश के लिए किसी पदाधिकारी के विरूद्व किसी न्यायालय में वाद नहीं चलाया जायेगा।

राज्य सरकार के नियन्त्रणाधीन वे सभी विभाग जो कि अधिनियम की धारा-2 (ज) के अनुसार लोक प्राधिकरण की परिभाषा में हैं, के द्वारा नियुक्त राज्य लोक सूचना अधिकारी अथवा सहायक जन सूचना अधिकारी के समक्ष आवेदन प्रस्तुत करना होगा। राज्य लोक सूचना अधिकारी के द्वारा ही सूचना उपलब्ध कराई जायेगी।

प्रत्येक लोक प्राधिकरण इस अधिनियम के पारित होने के सौ दिनों के अन्दर अपनी सभी प्रशासनिक इकाइयों तथा अधीनस्थ कार्यालयों में राज्य लोक सूचना अधिकारियों को नियुक्ति करेगा। इसके अलावा प्रत्येक उपखण्ड स्तर अथवा उपजिला स्तर पर सहायक लोक सूचना अधिकारी की नियुक्ति कर देगा। सभी प्रशासनिक इकाइयों तथा अधीनस्थ कार्यालयों में राज्य लोक सूचना अधिकारी/सहायक राज्य लोक सूचना अधिकारी का नाम एक पटल पर अंकित करना आवश्यक है।

अधिनियम की धारा 18 (क) के तहत शिकायत कर सकते है। इसके लिये आयोग को राज्य सूचना आयोग से सभी इसकी शिकायत कर सकते हैं। इसके लिए आयोग को कई तरह के अधिकार मिले हुए हैं तथा उसे दण्ड देने का भी अधिकार है।

सूचना का अधिकार अधिनियम 2015 के नियम 05(2) के प्राविधानों के अनुसार अभिलेखों के निरीक्षण के लिये प्रथम घंटा का निरीक्षण शुल्क 10/- और तत्पश्चात् प्रत्येक 15 मिनट एवं उसके ऑशिक भाग के लिये रु 5/- शुल्क देय होगा।

  • नकद के बदले रसीद द्वारा।
  • डिमांड ड्राफ्ट।
  • पोस्टल आर्डर।
  • बैंकर्स चेक।

आवेदक व्यक्तिगत रूप से राज्य लोक सूचना अधिकारी या सहायक राज्य लोक सूचना अधिकारी के पास जाकर अथवा किसी को भेजकर अथवा इन्हीं के नाम रजिस्टर्ड डाक से आवेदन भेज सकते हैं।

राज्य सरकार द्वारा सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 की धारा-27 की शक्तियों का उपयोग करते हुए एक विस्तृत एवं वृहद “उ0प्र0 सूचना का अधिकार नियमावली, 2015” का सृजन किया गया है। उसमें अधिनियम को लागू करने हेतु विस्तृत प्राविधान दिया गया है।

नहीं। किसी शिकायत अथवा अपील की सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता /अपीलार्थी स्वयं अथवा अपने प्राधिकृत प्रतिनिधि के माध्यम से उपस्थित हो सकता है। किन्तु ऐसे शिकायत अथवा अपील की सुनवाई के दौरान यदि राज्य सूचना आयोग यह आवश्यक पाता है कि शिकायतकर्ता अथवा अपीलार्थी की व्यक्तिगत् उपस्थिति लम्बित शिकायत/अपील के निस्तारण लिये आवश्यक है तो शिकायतकर्ता/अपीलार्थी को व्यक्तिगत रुप से उपस्थित हेतु आदेशित कर सकते हैं।

नहीं। नियमावली के प्राविधानों के अनुसार लम्बित शिकायत/अपील की सुनवाई के दौरान राज्य लोक सूचना अधिकारी स्वेच्छा से आयोग के समक्ष उपस्थित रह सकते हैं। किन्तु सुनवाई के दौरान आयोग अपने विवेकानुसार किसी राज्य लोक सूचना अधिकारी को व्यक्तिगत् रुप से अथवा यथोचित अधिकृत प्रतिनिधि के द्वारा सुनवाई के दौरान उपस्थित रहने के लिये निर्देशित कर सकता है।