Uttar Pradesh Information Commission

  FAQs

राज्य लोक सूचना अधिकारी के द्वारा दिये गये निर्णय के औचित्य को प्रमाणित करने का उत्तरदायित्व राज्य लोक सूचना अधिकारी पर है।

अपील की सुनवाई के उपरान्त आयोग राज्य लोक सूचना अधिकारी को सूचना प्रकट करने हेतु आदेशित कर सकता है एवं सूचना उपलब्ध कराने में राज्य लोक सूचना अधिकारी के स्तर से लापवरवाही पाये जाने अथवा समय से सूचना उपलब्ध न कराने की स्थिति में आयोग अर्थ दण्ड भी अधिरोपित कर सकता है अथवा लोक प्राधिकरण को राज्य सूचना अधिकारी के विरुद्ध विभागीय कार्यवाही की संस्तुति भी कर सकता है। अपील अधारहीन पाने पर निरस्त भी कर सकता है। इसके अतिरिक्त अपीलकर्ता को लोक प्राधिकरण से क्षतिपूर्ति भी दिला सकता है एवं लोक प्राधिकरण को अधिनियम के प्राविधानों को लागू करने हेतु भी निर्देशित कर सकता है।

किसी शिकायत की जॉच के लिये आयोग को कारगर जांच हेतु वे सभी अधिकार हैं जो किसी भी सिविल कोर्ट को निम्नलिखित मामलों में सिविल प्रोसीजर कोड 1908 के तहत प्राप्त हैं।

  • किसी भी व्यक्ति को सम्मन करने, आयोग के सामने उपस्थित होने, शपथ लेकर मौखिक या लिखित साक्ष्य देने या दस्तावेज या कोई वस्तु प्रस्तुत करने के लिए बाध्य करने का अधिकार।
  • दस्तावेज को खोज निकालने या निरीक्षण करने का अधिकार।
  • शपथ पत्र के माध्यम से साक्ष्य लेने का अधिकार।
  • किसी भी कार्यालय या न्यायालय से सार्वजनिक अभिलेख या उसकी प्रति मांगने का अधिकार।
  • गवाहियों या दस्तावेजों के परीक्षण के लिए सम्मन जारी करने का अधिकार।

नहीं, राज्य सूचना आयोग या केन्द्रीय सूचना आयोग के लिए शिकायत अथवा अपील के निस्तारण की कोई समय सीमा निर्धारित नहीं है।

सूचना आयोग को अधिनियम की धारा-20 के अन्तर्गत् राज्य लोक सूचना अधिकारी को दण्डित करने की शक्ति प्राप्त है। राज्य सूचना आयोग सूचना नहीं देने वाले राज्य लोक सूचना अधिकारी को दंडित कर सकता है।

यदि किसी शिकायत या अपील की सुनवाई के दौरान सूचना आयोग पाए कि:

  • राज्य लोक सूचना अधिकारी ने बिना उचित कारण के सूचना के लिए आवेदन/अनुरोध लेने से इंकार कर दिया है।
  • राज्य लोक सूचना अधिकारी ने निर्धारित समय सीमा के अंदर सूचना नहीं दी है।
  • सूचना के लिए आवेदन /अनुरोध को बदनियती के कारण इंकार किया है।
  • जान-बूझकर गलत, अधूरी, भ्रामक सूचना दी है।
  • मांगी गई सूचना को नष्ट किया है।
  • किसी भी तरह से सूचना देने में बाधा उत्पन्न की है।

शिकायत या अपील की सुनवाई के दौरान उपर्युक्त दोषों में से किसी दोष का दोषी पाये जाने पर राज्य लोक सूचना अधिकारी को सूचना आयोग 250/- प्रति दिन जिसकी अधिकतम सीमा 25000/- होगी से दंडित कर सकता है।

जी हॉ। अर्थ दण्ड अधिरोपित करने से पूर्व आयोग द्वारा राज्य लोक सूचना अधिकारी को सुनवाई का अवसर देना आवश्यक है।

सूचना का अधिकार के कार्यान्वयन एवं अनुश्रवण करने का अधिकार सूचना आयोग को है। अधिनिमय की धारा-25 के अनुसार वर्ष के अंत में आयोग अधिनियम के कार्यान्वयन पर अपना प्रतिवेदन तैयार करेगा और उसे राज्य सरकार को भेजेगा। सूचना आयोग वार्षिक प्रतिवेदन तैयार करने हेतु प्रत्येक लोक प्राधिकरण से निम्नलिखित प्रतिवेदन मांगेगा -

  • प्रत्येक लोक प्राधिकरण को सूचना के लिए दिये गये आवेदनों की संख्या।
  • ऐसे निर्णयों की संख्या जिसमें आवेदकों को सूचना नहीं दी गई और उन प्राविधानों का उल्लेख जिसके तहत सूचना आवेदन को अस्वीकार किया गया।
  • सूचना आयोग को किए गए अपीलों की संख्या, अपीलों के प्रकार-किस्म और उनके परिणाम।
  • इस अधिनियम के तहत कोई अनुशासनिक कार्यवाही हुई हो तो उसका ब्यौरा।
  • प्रत्येक लोक अधिकरण द्वारा वसूल किया गया शुल्क का ब्यौरा।
  • सूचना के अधिकार को कारगर करने के लिए अनुशंसा जो इस अधिनियम या किसी अन्य कानून को संशोधित करने के लिए अनुशंसा एवं अन्य सुझाव से संबंधित हो।।

सूचना आयोग को यह भी अधिकार है कि किसी लोक प्राधिकारण को अधिनियम के प्रावधानों के अनुरूप कार्य करने के लिए सही कदम सुझा सकता है। आयोग द्वारा तैयार वार्षिक प्रतिवेदन को विधायिका के पटल पर रखा जाएगा।

राज्य मुख्य सूचना आयुक्त एवं राज्य सूचना आयुक्त की नियुक्ति राज्यपाल एक समिति की अनुशंसा पर करेंगे। समिति के निम्न सदस्य होंगे।

  • मुख्यमंत्री    -        अध्यक्ष
  • विरोधी दल का नेता   -       सदस्य
  • मुख्यमंत्री द्वारा मनोनीत राज्य मंत्रीमंडल के एक केबिनेट मंत्री -      सदस्य

मुख्य सूचना आयुक्त एवं अन्य सूचना आयुक्तगण की नियुक्ति ऐसे व्यक्ति की होगी जो सार्वजनिक जीवन में ख्याति प्राप्त हो और जिन्हें विधि, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, समाज सेवा, प्रबंधन, पत्रकारिता, मीडिया या प्रशासन का व्यापक अनुभव हो।

अधिनियम में प्राविधान है कि इन पदों पर निम्नलिखित व्यक्तियों की नियुक्ति नहीं हो सकती:

  • संसद, राज्य या केन्द्र शासित प्रदेश की विधायिका के सदस्य
  • राजनीतिक दल से संबंधित व्यक्ति
  • कोई अन्य लाभ का पद धारण करने वाला व्यक्ति
  • जो व्यक्ति कोई व्यापार कर रहा हो
  • जो किसी पेशे में कार्यरत हो

राज्य सूचना आयोग के मुख्य सूचना आयुक्त एवं राज्य सूचना आयुक्त पदभार ग्रहण करने की तिथि से 5 वर्ष पूरा होने या 65 वर्ष की आयु पूर्ण होने पर सेवानिवृत हो जाएंगे। इनकी पुनः नियुक्ति नहीं होगी।