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Uttar Pradesh Information Commission

  FAQs

अधिनियम में दो स्तरीय अपील का प्रावधान है। प्रथम अपील राज्य लोक सूचना अधिकारी के निर्णय के विरूद्व उनसे वरीय विभागीय पदाधिकारी प्रथम अपीलीय प्राधिकारी के समक्ष प्रस्तुत की जाती है। एवं प्रथम अपीलीय प्राधिकारी के आदेश से क्षुब्ध होकर अथवा उनके अनिर्णय के कारण आवेदक द्वितीय अपील राज्य सूचना आयोग में प्रस्तुत कर सकता है।

प्रथम अपील राज्य लोक सूचना अधिकारी के निर्णय के बाद अथवा अनिर्णय की स्थिति में विभागीय अपीलीय प्राधिकारी के समक्ष आवेदन की तिथि के 30 दिनों के बाद प्रस्तुत करनी है। अपील नियमावली के प्रारुप-13 में अपीलकर्ता द्वारा प्रस्तुत की जायेगी।

अपील आवेदन प्राप्ति की तिथि से 30 दिनों के अन्दर विभागीय अपीलीय प्राधिकारी को निर्णय देना है। किन्तु विशेष परिस्थिति में यह अवधि 45 दिनों तक हो सकती है परन्तु उन्हें विलंब का लिखित कारण भी निर्णय में देना होगा।

विभागीय अपीलीय प्राधिकारी के द्वारा दिये गये निर्णय के विरुद्ध आवेदक 90 दिन के अन्दर उ0प्र0 सूचना आयोग के समक्ष द्वितीय अपील प्रस्तुत कर सकता है।

जी हां, आयोग के समक्ष प्रस्तुत की जाने वाली प्रत्येक द्वितीय अपील के साथ निम्नलिखित अभिलेख संलग्न करना आवश्यक है।

  • राज्य लोक सूचना अधिकारी को अधिनियम की धारा-6(1) के अन्तर्गत् सूचना प्राप्त करने हेतु प्रस्तुत किये गये आवेदन की प्रति।
  • प्रथम अपीलीय अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत प्रथम अपील की प्रति।
  • राज्य लोक सूचना अधिकारी के द्वारा पारित आदेश की प्रति यदि उनके द्वारा आदेश पारित किया गया है।
  • प्रथम अपीलीय अधिकारी के आदेश की प्रति यदि प्रथम अपीलीय अधिकारी द्वारा आदेश पारित किया गया है।
  • उन अभिलेखों की सूची एंव सत्यापित प्रतियां जिन्हें अपीलकर्ता ने अपील में संदर्भित किया हो तथा अपील के लिए जिन पर निर्भर है।

राज्य सूचना आयोग के समक्ष शिकायत प्रस्तुत करने के निम्नलिखित आधार हैः-

  • यदि राज्य लोक सूचना अधिकारी ने सूचना के लिए आवेदन या अपील के लिए आवेदन लेने से इंकार किया हो।
  • आवेदक का आवेदन इसलिए नहीं लिया जा रहा है क्योंकि लोक प्राधिकरण द्वारा राज्य लोक सूचना अधिकारी की नियुक्ति नहीं की गई है।
  • निर्धारित समय में सूचना देने से इंकार किया गया अथवा अभिलेख, दस्तावेज, आदि नहीं दिखलाया गया हो।
  • यदि समय सीमा के अंदर सूचना नहीं दी गई हो।
  • यदि आवेदक को लगे कि उससे सूचना के लिए, अनुचित अर्थात अधिक शुल्क की मांग की जा रही हो।
  • यदि आवेदक को लगे कि उसको अधूरा, भ्रामक, या गलत सूचना दी गई है।
  • यदि मांगी गई सूचना को राज्य लोक सूचना अधिकारी द्वारा नष्ट किया गया है अथवा सूचना देने में उनके द्वारा बाधा पहुंचाई जाती है।

केन्द्रीय सरकार द्वारा स्थापित कार्यालयों/संस्थाओं में आवेदक को सूचना नहीं मिलने या सूचना से असंतुष्ट होने पर केन्द्रीय सूचना आयोग में द्वितीय अपील प्रस्तुत की जाएगी। राज्य सरकार द्वारा गठित संगठनों/संस्थाओं द्वारा दी गई सूचना से असंतुष्ट होने पर अथवा सूचना न मिलने पर आवेदक को द्वितीय अपील राज्य सूचना आयोग के समक्ष प्रस्तुत करनी होगी।

नहीं, दोनों सूचना आयोगों का क्षेत्राधिकार अलग-अलग है और द्वितीय अपील एवं शिकायत सुनने का समान अधिकार है। केन्द्रीय सूचना आयोग, राज्य सूचना आयोग की अपीलीय संस्था नहीं है।

अपील के निस्तारण में आयोग द्वारा निम्नलिखित प्रक्रिया अपनाई जाती हैः

  • शपथ अथवा शपथ पत्र पर मौखिक अथवा लिखित साक्ष्य लेना।
  • अभिलेख का मूल्यांकन करना।
  • लोक सूचना अधिकारी अथवा अपीलीय प्राधिकारी (जिसने प्रथम अपील की सुनवाई की है) को सम्मन करना।
  • किसी तृतीय पक्ष को भी सुनवाई हेतु सम्मन करना।
  • राज्य लोक सूचना अधिकारी अथवा विभागीय अपीलीय प्राधिकारी जिसने प्रथम अपील की सुनवाई की, से आवश्यक साक्ष्य प्राप्त करना।

आयोग निम्नलिखित में से किसी तरीके से नोटिस की तामीला करेगा।

  • यथास्थिति, शिकायतकर्ता, अपीलार्थी या प्रतिवादी द्वारा तामील कराके,
  • आदेशिका वाहक के माध्यम से दस्ती परिदान द्वारा,
  • पंजीकृत डाक या स्पीड-पोस्ट द्वारा,
  • ई-मेल पता उपलब्ध होने की दशा में, ई-मेल द्वारा,

आयोग में शिकायत अथवा अपील की खुली सुनवाई की जाती है एवं आयोग अपना निर्णय लिखित रुप में पारित करेगा जो आयोग के रजिस्ट्रार अथवा आयोग के प्राधिकृत अधिकारी द्वारा अभिप्रमाणित किया जायेगा।

जी हां, आयोग के कार्य संचालन हेतु संधारित की जानी वाली पंजिकाओं का प्रारुप उ0प्र0 सूचना का अधिकार नियमावली, 2015 के परिशिष्ट में अंकित किया गया है।