Uttar Pradesh Information Commission

  FAQs

मांगी गई सूचना तीसरे पक्षकार से संबंधित है तो ऐसी सूचना 40 दिनों में आवेदक को उपलब्ध करायी जायेगी।

आवेदक को सूचना राज्य लोक सूचना अधिकारी द्वारा दी जाएगी। प्रत्येक लोक प्राधिकरण द्वारा किसी अधिकारी को राज्य लोक सूचना अधिकारी के रूप में नामित किया जाएगा।

आवेदक को सूचना राज्य लोक सूचना अधिकारी के द्वारा ही दी जायेगी। सूचना देने की जवाबदेही उन्हीं की है। सहायक लोक सूचना अधिकारी की जवाबदेही सूचना उपलब्ध कराना नहीं है। सहायक लोक सूचना अधिकारी का कार्य सूचना के लिए आवेदन या अपील या शिकायत प्राप्त करना और उसे राज्य लोक सूचना अधिकारी या अपीलीय प्राधिकारी या राज्य सूचना आयोग को अपील या आवेदन भेज देना है।

अभिलेख के निरीक्षण हेतु पहले एक घंटे के लिए दस रुपया फीस देय होगी। उसके बाद प्रति 15 मिनट या उसके अंश के लिए 5 रूपये की दर से शुल्क देय होगा। दस्तावेज के निरीक्षण की भी वही प्रक्रिया है जो धारा 6(1) के अन्तर्गत् सूचना प्राप्त करने हेतु किसी लोक प्राधिकरण को प्रस्तुत किया जाता है जिसकी प्रक्रिया प्रश्न सं0 13 में स्पष्ट की गई है।

सैम्पल या मॉडल के लिए भी लोक सूचना अधिकारी को आवेदन देना होगा। आवेदक को सैम्पल या माडल का वास्तविक मूल्य शुल्क के रुप में देना होगा।

यह अधिनियम केन्द्रीय सरकार द्वारा स्थापित आसूचना और सुरक्षा संगठनों जिनका विवरण दूसरी अनुसूची में विनिर्दिष्ट है, लागू नहीं है जिसका विवरण निम्नवत् हैः-

  • आसूचना ब्यूरो
  • मंत्रिमण्डल सचिवालय के अनुसंधान और विश्लेषण खण्ड
  • राजस्व आसूचना निदेशालय
  • केन्द्रीय आर्थिक आसूचना ब्यूरो
  • प्रवर्तन निदेशालय
  • स्वापक नियंत्रण ब्यूरो
  • वैमानिक अनुसंधान केन्द्र
  • विशेष सीमान्त बल
  • सीमा सुरक्षा बल
  • केन्द्रीय आरक्षित पुलिस बल
  • भारत तिब्बत सीमा बल
  • केन्द्रीय आद्योगिक सुरक्षा बल
  • राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड
  • असम राइफल
  • सशस्त्र सीमाबल
  • आयकर महानिदेशालय (अन्वेषण)
  • राष्ट्रीय तकनीकी अनुसंधान संगठन
  • वित्तीय आसूचना यूनिट भारत
  • विशेष संरक्षा ग्रुप
  • रक्षा अनुसंधान तथा विकास संगठन
  • सीमा सड़क विकास बोर्ड
  • राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय
  • केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो
  • राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण
  • राष्ट्रीय आसूचना ग्रिड

सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 8 व 9 के विधिक प्राविधानों के अनुसार लोक प्राधिकरणों को निम्न लिखित सूचनाएं प्रकट करने से छूट प्राप्त है, जिन्हें वर्णित प्राविधानों के विपरीत प्रकट करने के लिये राज्य लोक सूचना अधिकारी को बाध्य नहीं किया जा सकता।

  • सूचना जिसके प्रकटन से, भारत की प्रभुता और अखण्डता, राज्य की सूरक्षा, रणनीति, वैज्ञानिक या आर्थिक हित विदेश से सम्बन्ध पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता हो, या किसी अपराध को करने का उद्दीपन होता हो;
  • सूचना, जिसके प्रकटन से किसी न्यायालय या अधिकरण द्वारा अभिव्यक्त रुप से निषिद्ध किया गया है या जिसके प्रकटन से न्यायालय का अवमान होता हो;
  • सूचना जिसके प्रकटन से संसद या किसी राज्य के विधान-मण्डल के विशेषाधिकार भंग हो सकते हों;
  • सूचना, जिसमें वाणिज्यिक-विश्वास, व्यापार गोपनीयता या बौद्धिक संपदा, सम्मिलित है, जिसके प्रकटन से किसी तीसरे पक्षकार की प्रतियोगी स्थिति को नुकसान होता है, यदि लोक सूचना अधिकारी का यह समाधान नहीं हो जाता है कि ऐसी सूचना का प्रकटन विस्तृत लोक हित में आवश्यक है;
  • किसी व्यक्ति को उसकी वैश्वासिक नातेदारी में उपलब्ध सूचना यदि लोक सूचना अधिकारी का यह समाधान नहीं हो जाता है कि ऐसी सूचना के प्रकटन में विस्तृत लोक हित आवश्यक है;
  • किसी विदेशी सरकार से विश्वास में प्राप्त सूचना;
  • सूचना, जिसके प्रकट करने से किसी व्यक्ति के जीवन या शारीरिक सुरक्षा के लिए या सूचना के संसाधन की पहचान करने में या विश्वास में दी गई सहायता या सुरक्षा प्रयोजनों के लिए खतरा होगा;
  • सूचना, जिसके प्रकट करने से अन्वेषण या अपराधियों के गिरफ्तार करने या अभियोजन की क्रिया में अड़चन पड़ेगी;
  • मंत्रिमण्डल के कागज-पत्र, जिसमें मंत्रिपरिषद् के सचिवों और अन्य अधिकारियों के विचार-विमर्श के अभिलेख सम्मिलित हैं;
    परन्तु यह कि मंत्रिपरिषद् के विनिश्चय उनके कारण तथा यह सामग्र्री जिसके आधार पर विनिश्चय किए गए थे, विनिश्चय किए जाने और विषय को पूरा या समाप्त होने के पश्चात् जनता को उपलब्ध कराया जाएगा;
    परन्तु यह और कि वे विषय जो इस धारा में सूचीबद्ध छूटों के अन्तर्गत् आते हैं, प्रकट नहीं किए जायेगें;
  • सूचना, जो व्यक्तिगत् सूचना से सम्बन्धित है, जिसके प्रकट करने का किसी लोक क्रियाकलाप या हित से सम्बन्ध नहीं है या जिससे व्यक्ति की एकान्तता पर अनावश्यक अतिक्रमण नहीं होता है, यदि यथास्थिति राज्य लोक सूचना अधिकारी या अपील प्राधिकारी का यह समाधान नहीं हो जाता है कि ऐसी सूचना का प्रकटन विस्तृत लोक हित में न्यायोचित है;
    अधिनियम की धारा-9 के अनुसार धारा-8 के उपबन्धों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना कोई यथा स्थिति राज्य लोक सूचना अधिकारी सूचना के किसी अनुरोध को अस्वीकार कर सकेगा जहॉ पहुच उपलब्ध कराने के ऐसे अनुरोध में राज्य से भिन्न किसी व्यक्ति विद्यमान प्रतिलिप्याधिकार का उल्लंघन अंन्र्तवलित है।
  • यदि किसी दस्तावेज का कुछ भाग संवेदनशील है जिसे उपर्युक्त क्रमांक 39 के प्रश्नोत्तर में सूचना नहीं देनी है साथ ही यदि उसी दस्तावेज का कुछ भाग गैर संवेदनशील है, सामान्य सूचनाएं हैं और उसे पृथक् (अलग) किया जा सकता है तो ऐसी खण्ड सूचनाएं दी जाएंगी।

    राज्य लोक सूचना अधिकारी द्वारा यदि आवेदन अस्वीकार किया जाता है तो तर्कसंगत कारण भी लिखना होगा। साथ ही अपील के अधिकार, अपील करने की अवधि एवं अपील सुनने वाले अधिकारी का नाम, पदनाम, आदि के बारे में भी आवेदक को सूचित करना होगा। राज्य लोक सूचना अधिकारी नियमावली के प्रारुप-7 में ऐसी सूचना आवेदक को देगा।

    प्रत्येक लोक प्राधिकरण अपने से संबंधित सूचनाओं को स्वतः संचार के विभिन्न माध्यमों से आम जनता तक पहुंचाएंगे। इसके लिए वे सूचना पट्ट, समाचार पत्र, सार्वजनिक घोषणा, रेडियो, टेलीविजन, इंटरनेट समेत अन्य सभी साधनों का उपयोग करेंगे।

    सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा-4(1)(बी) के विधिक प्राविधानों के अनुसार प्रत्येक लोक प्राधिकरण को सूचनाओं का प्रकाशन करना अनिवार्य है।

    यदि राज्य लोक सूचना अधिकारी समय-सीमा के अंदर सूचना उपलब्ध नहीं कराते, अथवा गलत सूचना देते हैं, अथवा अपूर्ण सूचना देते हैं, अथवा आवेदक का आवेदन स्वीकार नहीं करते, अथवा जानबूझकर भ्रमित करने वाली सूचना देते हैं, अथवा अधिक फीस माॅगते हैं, अथवा सूचना को नष्ट करते हैं या सूचना देने में बाधा उत्पन्न करते हैं तो आवेदक राज्य सूचना आयोग में सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 की धारा-18 के अन्तर्गत् शिकायत प्रस्तुत कर सकता है।